पहले घर-घर पे जाकर दूध बेचा,ट्यूशन देकर निकाला पढाई का खर्च, उधार लेकर किया काम आज वह बंधन बैंंक का मालिक है।

सफलता story- 1960 में त्रिपुरा के अगरतला में जन्‍में चंद्रशेखर घोष के पिता की मिठाई की एक छोटी सी दुकान थी, उनका परिवार मूल रूप से बांग्‍लादेश का ही है और आजादी के समय वे शरणार्थी बनकर त्रिपुरा में आ गए थे.

note- लगभग डेढ दशक तक बांग्‍लादेश में काम करने के बाद 1997 में चंद्रशेखर घोष कोलकाता आ गए

  1. चंद्रशेखर घोष का जन्‍म 1960 में त्रिपुरा के अगरतला में हुआ..
  2. घोष में ढाका यूनिवर्सिटी से 1978 में स्‍टैटिस्टिक्‍स में ग्रेजुएशन किया…
  3. 1985 में उन्‍होंने बांग्‍लादेश में एक एनजीओ में नौकरी शुरू की…

कहते हैं कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती. दुनयिा में न जाने कितनी ही शख्सियतों ने इस पंक्ति को चरितार्थ किया र्है. इन्‍हीं लोगों में एक नाम बंधन बैंक के फाउंडर और सीईओ चंद्रशेखर घोष का भी है. आज अरबपति बन चुकेक चंद्रशेखर घोष कभी पाई-पाई को मोहताज थे। अपनी गरीबी दूूरकरने कके लिए उन्‍होंनेे संघर्ष किया और उसी काानतीजा है कि आज वह एक सफल इंसान हैं.

अपना गुजारा चलाने को कभी दूध बेचने वाले चंंद्रशेखर आज बंधन बैंक के मालिक हैं जिसका बाजर पूंजीकरण 28997 करोड रूपये है. उनका कहना है कि अपनी मेहनत और हुनर से कोई भी व्‍यक्ति दुनिया में कोई भी मुकाम हासिल कर सकता है. उन्‍होंने कभी किसी काम को छोटा नही समझा. पढाई केे बाद उन्‍हाेनेे एनजीओं में कम वेतन में नौकरी भी की.

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